एमपी में भीषण गर्मी, अस्पतालों में रोज 150-200 मरीज:ग्वालियर में ट्रैफिक पुलिस ने 24 चौराहों पर सिग्नल ब्लिंकर मोड में किए, ग्रीन नेट भी लगाए
एमपी में भीषण गर्मी, अस्पतालों में रोज 150-200 मरीज:ग्वालियर में ट्रैफिक पुलिस ने 24 चौराहों पर सिग्नल ब्लिंकर मोड में किए, ग्रीन नेट भी लगाए
एमपी में बढ़ती भीषण गर्मी ने जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। तापमान 43 डिग्री के पार पहुंच चुका है। ऐसे में प्रदेश के बड़े अस्पतालों में रोजाना करीब 200 मरीज, जिनमें अधिकांश बच्चे शामिल हैं, उल्टी-दस्त और पेट दर्द जैसी समस्याओं के चलते अस्पताल पहुंच रहे हैं। राजधानी भोपाल में ही बढ़ती गर्मी के साथ बच्चों में उल्टी-दस्त (गैस्ट्रोएंटेराइटिस) के मामले तेजी से सामने आए हैं। पिछले एक हफ्ते से अस्पतालों में इस तरह के मरीजों की संख्या में इजाफा देखा गया है। हमीदिया अस्पताल की ओपीडी में 20 से 25 प्रतिशत मरीज उल्टी-दस्त और बुखार की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। वहीं ग्वालियर में एक सप्ताह से गर्मी के चलते बीमार हुए मरीजों की संख्या 150 के करीब बनी हुई है। ग्वालियर के डॉ. अजय गौड़ के अनुसार, बढ़ती गर्मी के कारण अस्पतालों में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। रोजाना 100 से 150 बच्चे अपने परिजनों के साथ इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें से अधिकांश बच्चों को उल्टी, दस्त और पेट दर्द की शिकायत है। ऐसे में इलाज के साथ-साथ लोगों को ज्यादा पानी और तरल पदार्थ लेने की सलाह दी जा रही है, ताकि डिहाइड्रेशन से बचा जा सके।
चौराहों में ग्रीन नेट, सिग्नल ब्लिंक मोड में ग्वालियर में लोगों को राहत देने के लिए ट्रैफिक पुलिस ने अहम फैसला लिया है। अब शहर के 31 में से 24 प्रमुख चौराहों पर दोपहर के समय ट्रैफिक सिग्नल ‘ब्लिंकर मोड’ पर संचालित किए जाएंगे, ताकि लोगों को तेज धूप में अधिक देर तक खड़ा न रहना पड़े। इसके साथ ही कुछ चौराहों पर सिग्नल के ऊपर ग्रीन नेट भी लगाए जा रहे हैं, जिससे वाहन चालकों को गर्मी से राहत मिल सके। ट्रैफिक पुलिस के इस फैसले के तहत दोपहर 1 बजे से शाम 4 बजे तक चयनित चौराहों पर सिग्नल की सामान्य लाल-पीली-हरी व्यवस्था बंद रहेगी। इसके स्थान पर केवल पीली लाइट लगातार ब्लिंक करती रहेगी। इसका मतलब यह होगा कि वाहन चालकों को रुकने की जरूरत नहीं होगी, बल्कि सावधानीपूर्वक देखकर आगे बढ़ना होगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य तेज धूप में सिग्नल पर खड़े रहने की परेशानी से लोगों को राहत देना है। गर्मी और लू जैसे हालात को देखते हुए यह कदम उठाया गया है, क्योंकि दोपहर के समय सड़क पर खड़े रहना खासकर दुपहिया चालकों और बुजुर्गों के लिए मुश्किल हो रहा है। जिन प्रमुख चौराहों पर यह व्यवस्था लागू की गई है, उनमें नदी गेट, गोविंदपुरी, हॉस्पिटल चौराहा, चेतकपुरी, सिटी सेंटर, थाटीपुर और परशुराम तिराहा शामिल हैं। इन स्थानों पर दोपहर 1 बजे से शाम 4 बजे तक सिग्नल ब्लिंकर मोड पर रहेगा, यानी केवल पीली बत्ती जलती-बुझती रहेगी।
अधिक ट्रैफिक दबाव वाले चौराहों पर चालू रहेगा हालांकि, कुछ व्यस्त चौराहों को इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है, जहां ट्रैफिक का दबाव अधिक रहता है। इनमें डीडी नगर चौराहा, पिंटू पार्क तिराहा, गोला का मंदिर, आकाशवाणी तिराहा, तानसेन तिराहा, यूनिवर्सिटी तिराहा और नाका चंद्रवदनी चौराहा शामिल हैं, जहां सामान्य सिग्नल व्यवस्था जारी रहेगी। इसके अलावा, कई चौराहों पर लोगों को धूप से बचाने के लिए ग्रीन नेट लगाए जा रहे हैं, ताकि सिग्नल पर इंतजार कर रहे लोगों को छांव मिल सके। ग्रीन नेट लगाने का काम जारी एएसपी अनु बेनीवाल ने बताया कि जिन चौराहों पर ट्रैफिक का दबाव कम है, वहां सिग्नल को समय-समय पर बंद भी किया जा रहा है। साथ ही, जहां ज्यादा देर इंतजार करना पड़ता है, वहां ग्रीन नेट लगाए जा रहे हैं, जिनमें से कुछ स्थानों पर यह व्यवस्था शुरू भी हो चुकी है।
एमपी में बढ़ती भीषण गर्मी ने जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। तापमान 43 डिग्री के पार पहुंच चुका है। ऐसे में प्रदेश के बड़े अस्पतालों में रोजाना करीब 200 मरीज, जिनमें अधिकांश बच्चे शामिल हैं, उल्टी-दस्त और पेट दर्द जैसी समस्याओं के चलते अस्पताल पहुंच रहे हैं। राजधानी भोपाल में ही बढ़ती गर्मी के साथ बच्चों में उल्टी-दस्त (गैस्ट्रोएंटेराइटिस) के मामले तेजी से सामने आए हैं। पिछले एक हफ्ते से अस्पतालों में इस तरह के मरीजों की संख्या में इजाफा देखा गया है। हमीदिया अस्पताल की ओपीडी में 20 से 25 प्रतिशत मरीज उल्टी-दस्त और बुखार की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। वहीं ग्वालियर में एक सप्ताह से गर्मी के चलते बीमार हुए मरीजों की संख्या 150 के करीब बनी हुई है। ग्वालियर के डॉ. अजय गौड़ के अनुसार, बढ़ती गर्मी के कारण अस्पतालों में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। रोजाना 100 से 150 बच्चे अपने परिजनों के साथ इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें से अधिकांश बच्चों को उल्टी, दस्त और पेट दर्द की शिकायत है। ऐसे में इलाज के साथ-साथ लोगों को ज्यादा पानी और तरल पदार्थ लेने की सलाह दी जा रही है, ताकि डिहाइड्रेशन से बचा जा सके।
चौराहों में ग्रीन नेट, सिग्नल ब्लिंक मोड में ग्वालियर में लोगों को राहत देने के लिए ट्रैफिक पुलिस ने अहम फैसला लिया है। अब शहर के 31 में से 24 प्रमुख चौराहों पर दोपहर के समय ट्रैफिक सिग्नल ‘ब्लिंकर मोड’ पर संचालित किए जाएंगे, ताकि लोगों को तेज धूप में अधिक देर तक खड़ा न रहना पड़े। इसके साथ ही कुछ चौराहों पर सिग्नल के ऊपर ग्रीन नेट भी लगाए जा रहे हैं, जिससे वाहन चालकों को गर्मी से राहत मिल सके। ट्रैफिक पुलिस के इस फैसले के तहत दोपहर 1 बजे से शाम 4 बजे तक चयनित चौराहों पर सिग्नल की सामान्य लाल-पीली-हरी व्यवस्था बंद रहेगी। इसके स्थान पर केवल पीली लाइट लगातार ब्लिंक करती रहेगी। इसका मतलब यह होगा कि वाहन चालकों को रुकने की जरूरत नहीं होगी, बल्कि सावधानीपूर्वक देखकर आगे बढ़ना होगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य तेज धूप में सिग्नल पर खड़े रहने की परेशानी से लोगों को राहत देना है। गर्मी और लू जैसे हालात को देखते हुए यह कदम उठाया गया है, क्योंकि दोपहर के समय सड़क पर खड़े रहना खासकर दुपहिया चालकों और बुजुर्गों के लिए मुश्किल हो रहा है। जिन प्रमुख चौराहों पर यह व्यवस्था लागू की गई है, उनमें नदी गेट, गोविंदपुरी, हॉस्पिटल चौराहा, चेतकपुरी, सिटी सेंटर, थाटीपुर और परशुराम तिराहा शामिल हैं। इन स्थानों पर दोपहर 1 बजे से शाम 4 बजे तक सिग्नल ब्लिंकर मोड पर रहेगा, यानी केवल पीली बत्ती जलती-बुझती रहेगी।
अधिक ट्रैफिक दबाव वाले चौराहों पर चालू रहेगा हालांकि, कुछ व्यस्त चौराहों को इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है, जहां ट्रैफिक का दबाव अधिक रहता है। इनमें डीडी नगर चौराहा, पिंटू पार्क तिराहा, गोला का मंदिर, आकाशवाणी तिराहा, तानसेन तिराहा, यूनिवर्सिटी तिराहा और नाका चंद्रवदनी चौराहा शामिल हैं, जहां सामान्य सिग्नल व्यवस्था जारी रहेगी। इसके अलावा, कई चौराहों पर लोगों को धूप से बचाने के लिए ग्रीन नेट लगाए जा रहे हैं, ताकि सिग्नल पर इंतजार कर रहे लोगों को छांव मिल सके। ग्रीन नेट लगाने का काम जारी एएसपी अनु बेनीवाल ने बताया कि जिन चौराहों पर ट्रैफिक का दबाव कम है, वहां सिग्नल को समय-समय पर बंद भी किया जा रहा है। साथ ही, जहां ज्यादा देर इंतजार करना पड़ता है, वहां ग्रीन नेट लगाए जा रहे हैं, जिनमें से कुछ स्थानों पर यह व्यवस्था शुरू भी हो चुकी है।